Follow Us:

हिमाचल प्रदेश में कन्या-बाल स्कूल होंगे को-एजुकेशन, एक CBSE तो दूसरा HP बोर्ड के अधीन

➤ अलग-अलग चल रहे कन्या और बाल स्कूलों को किया जाएगा मर्ज
➤ एक स्कूल रहेगा CBSE के तहत, दूसरा HP बोर्ड के अधीन
➤ तीन वर्षों में 1300 प्राइमरी स्कूल पहले ही हो चुके हैं मर्ज

हिमाचल प्रदेश सरकार ने जिन क्षेत्रों में कन्या और बाल स्कूल अलग-अलग संचालित हो रहे हैं, उन्हें पहले को-एजुकेशन प्रणाली में लाने और फिर उनमें से एक को Central Board of Secondary Education (CBSE) के अधीन करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं।

मंडी शहर में भी कन्या और बाल स्कूलों को मर्ज कर को-एजुकेशन बनाया जा रहा है। इनमें से एक स्कूल CBSE के अधीन रहेगा, जबकि दूसरा Himachal Pradesh Board of School Education (HP बोर्ड) के तहत संचालित होगा।

अभिभावकों को मिलेगा विकल्प

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में बताया कि सरकार की मंशा है कि एक ही क्षेत्र में दोनों बोर्ड उपलब्ध हों, ताकि विद्यार्थी और अभिभावक अपनी सुविधा और पसंद के अनुसार बोर्ड का चयन कर सकें।

घटती नामांकन संख्या बनी वजह

शिक्षा मंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में प्रदेश सरकार 1300 प्राइमरी स्कूलों का विलय कर चुकी है। कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या अत्यंत कम थी या नामांकन नहीं के बराबर था, जिसके चलते उन्हें समीपवर्ती स्कूलों में मर्ज किया गया।

उन्होंने कहा कि बीते 20-22 वर्षों में सरकारी स्कूलों में दाखिले में भारी गिरावट आई है। पहले कक्षा 1 से 8 तक लगभग 9.71 लाख नामांकन थे, जो अब घटकर करीब 4.2 लाख रह गए हैं। जन्म दर में कमी भी इसका एक प्रमुख कारण है।

सरकार का दावा है कि स्कूलों के एकीकरण से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और विद्यार्थियों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा मिल सकेगी।